मुहब्बत के दरिया में डुबकी ना लगाई मैंने ।
हुस्न के मेले में कोई बात ना चलाई मैंने ।
देखता रोज शहर के बाजारों में लैला मजनु ,
अपने दिल में मुहब्बत की आग ना लगाई मैंने ।
"जय कुमार" 02/05/14
हुस्न के मेले में कोई बात ना चलाई मैंने ।
देखता रोज शहर के बाजारों में लैला मजनु ,
अपने दिल में मुहब्बत की आग ना लगाई मैंने ।
"जय कुमार" 02/05/14
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