जन्म हुआ तो
बधाई गीत गाये
हर्ष मनाये
थोड़ा चला जो
चारो तरफ दोड़ा
कल्पना लोक
किशोर हुआ
संवेगों में घिरा तु
बेबाक चला
जवानी दगा
लेकर आई जब
मस्त मगन
भूला जीवन
सोया नींदभर तु
अहं में मन
बुढ़ापा जब
आया देह थकी तो
रोना आ गया
सोना भूला तु
खोने को कुछ नहीं
जींड़ शरीर
दिन आया वो
पत्ता टूटा डाली से
उड़ा आकाश
छोड़ी अपनी
धन दौलत बच्चे
महिल सब
रहा बस तु
कर्म धरम मर्म
ले गया साथ
"जय कुमार" 10/05/14
बधाई गीत गाये
हर्ष मनाये
थोड़ा चला जो
चारो तरफ दोड़ा
कल्पना लोक
किशोर हुआ
संवेगों में घिरा तु
बेबाक चला
जवानी दगा
लेकर आई जब
मस्त मगन
भूला जीवन
सोया नींदभर तु
अहं में मन
बुढ़ापा जब
आया देह थकी तो
रोना आ गया
सोना भूला तु
खोने को कुछ नहीं
जींड़ शरीर
दिन आया वो
पत्ता टूटा डाली से
उड़ा आकाश
छोड़ी अपनी
धन दौलत बच्चे
महिल सब
रहा बस तु
कर्म धरम मर्म
ले गया साथ
"जय कुमार" 10/05/14
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