Monday, 12 May 2014

जन्म हुआ तो

जन्म हुआ तो
बधाई गीत गाये
हर्ष मनाये

थोड़ा चला जो
चारो तरफ दोड़ा
कल्पना लोक

किशोर हुआ
संवेगों में घिरा तु
बेबाक चला

जवानी दगा
लेकर आई जब
मस्त मगन

भूला जीवन
सोया नींदभर तु
अहं में मन

बुढ़ापा जब
आया देह थकी तो
रोना आ गया

सोना भूला तु
खोने को कुछ नहीं
जींड़ शरीर

दिन आया वो
पत्ता टूटा डाली से
उड़ा आकाश

छोड़ी अपनी
धन दौलत बच्चे
महिल सब

रहा बस तु
कर्म धरम मर्म
ले गया साथ

"जय कुमार" 10/05/14

No comments:

Post a Comment