Monday, 12 May 2014

ना जाने कहाँ

ना जाने कहाँ से आ गये
बड़ो मीठो राग सुना गये
मोइरी बातें सुनके भैया
बे मोइहो लबरा बना गये

ना जाने कहाँ से आ गये …

हमई खो तो लूटत रये बे
हमई खो तो कूटत रये बे
उनने खाई रबड़ी मलाई
बे हमें तो मठा पकरा गये

ना जाने कहाँ से आ गये …

मोइरे घर में तो रहत रये 
मोइरो तो बे खाऊत रये
जिनके संगे मैं बैठत रयो 
बे मोरी ओइसे भिडा गये

ना जाने कहाँ से आ गये ....

रहत रये हम संगें सदईं
गले मिलत रये हम सदईं
उनने चलीं ऐसी चाले खूबई
बे दूध में जहर मिला गये

न जाने कहाँ से आ गये.....




"जय कुमार " १३/०५ /१४

No comments:

Post a Comment