चकमक की
चिंगारी पल भर
में खत्म होती
प्रकाश देती
जग जन जीव को
एक चिंगारी
अहसासों के
दृढ़ता से भरे भावों
का प्रकाश वो
अहं मद को
निर्मूल कर जाता
लोभ मुक्त वो
वो अहसास
जीवित रहा सदा
स्वप्न रहा जो
दृष्टि पटल
पाया ना कभी मैंने
मन में बैठा
सिंचित किया
जीवन की बगिया
उन्ही पलों ने
रोशन कर
जर्रा जर्रा नूर वो
मन की आशा
"जय कुमार" 10/05/14
चिंगारी पल भर
में खत्म होती
प्रकाश देती
जग जन जीव को
एक चिंगारी
अहसासों के
दृढ़ता से भरे भावों
का प्रकाश वो
अहं मद को
निर्मूल कर जाता
लोभ मुक्त वो
वो अहसास
जीवित रहा सदा
स्वप्न रहा जो
दृष्टि पटल
पाया ना कभी मैंने
मन में बैठा
सिंचित किया
जीवन की बगिया
उन्ही पलों ने
रोशन कर
जर्रा जर्रा नूर वो
मन की आशा
"जय कुमार" 10/05/14
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