निर्मल मन
शांत जल बहाव
रहता स्थिर
पवन वेग
आग ज्वाला ना कर
पाती आस्थिर
सत्कर्म मन
रहता उदार है
दया से भरा
पुष्प खुशबु
स्वाभाव से देता है
ना कि समय
हित निर्णय
जगत का करे वो
विवेकवान
प्रेम सागर
भरा रहता जहाँ
सदभाव हो
चलना कार्य
मानव का कर्तव्य
बढ़ाता भाग्य
पाना व खोना
विचलित ना करें
समभाव हो
जन्म व मृत्यु
भयभीत ना करें
सत्य ज्ञान हो
"जय कुमार" 12/05/14
शांत जल बहाव
रहता स्थिर
पवन वेग
आग ज्वाला ना कर
पाती आस्थिर
सत्कर्म मन
रहता उदार है
दया से भरा
पुष्प खुशबु
स्वाभाव से देता है
ना कि समय
हित निर्णय
जगत का करे वो
विवेकवान
प्रेम सागर
भरा रहता जहाँ
सदभाव हो
चलना कार्य
मानव का कर्तव्य
बढ़ाता भाग्य
पाना व खोना
विचलित ना करें
समभाव हो
जन्म व मृत्यु
भयभीत ना करें
सत्य ज्ञान हो
"जय कुमार" 12/05/14
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