चलने के लिए दो पैर काफी होते ।
बढ़ने के लिए हौंसले काफी होते ।
अहं मद लालच ने भटकाया है ,
खाने के लिए अनाज काफी होते ।
जीने के लिए जीवन काफी होता ।
छोड़ने के लिए अहं काफी होता ।
कुछ पाने के खातिर झगड़ते क्यों ,
पाने के लिए प्रेम ही काफी होता ।
समझने के लिए खुद को समझ लो ।
झगड़ने के लिए खुद से झगड़ लो ।
मैं का खेल समझा तो सब समझा ,
बिछड़ने के लिए मैं से बिछड़ लो ।
"जय कुमार" 2/05/14
बढ़ने के लिए हौंसले काफी होते ।
अहं मद लालच ने भटकाया है ,
खाने के लिए अनाज काफी होते ।
जीने के लिए जीवन काफी होता ।
छोड़ने के लिए अहं काफी होता ।
कुछ पाने के खातिर झगड़ते क्यों ,
पाने के लिए प्रेम ही काफी होता ।
समझने के लिए खुद को समझ लो ।
झगड़ने के लिए खुद से झगड़ लो ।
मैं का खेल समझा तो सब समझा ,
बिछड़ने के लिए मैं से बिछड़ लो ।
"जय कुमार" 2/05/14
No comments:
Post a Comment