टूटता पत्ता
चलती हवाओं में
किधर गया
आत्मा से हुआ
अलग तन अब
बिखर गया
बचती देह
पंच तत्वों में मिली
प्रकृति साथ
शून्य से शुरु
किया तूने जीवन
शून्य में खत्म
अच्छे बुरे के
बीज बोये जो तूने
अमर रहे
धरोहर में
जग को छोड़े फल
जो खट्टे मीठे
"जय कुमार" 08/05/14
चलती हवाओं में
किधर गया
आत्मा से हुआ
अलग तन अब
बिखर गया
बचती देह
पंच तत्वों में मिली
प्रकृति साथ
शून्य से शुरु
किया तूने जीवन
शून्य में खत्म
अच्छे बुरे के
बीज बोये जो तूने
अमर रहे
धरोहर में
जग को छोड़े फल
जो खट्टे मीठे
"जय कुमार" 08/05/14
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