ख्वायिशों को कफन पहनाया ना करो ।
जले दीपकों को ऐसे बुजाया ना करो ।
शक्ति का समुंदर समाया तेरे अंदर ,
अपनी हिम्मत को ऐसे मिटाया ना करो ।
जिसमें ना रह पाये एक साथ दो भाई ,
कच्चे धागों के ऐसे घर बनाया ना करो ।
जिस जश्न में मुहब्बत ना दिखे यारो ,
महफिलों को फिर ऐसीं सजाया ना करो ।
इंसान की फितरत इंसान ही पड़ लेता ,
मजहब के नाम पर आग लगाया ना करो ।
भूखे बच्चे रोते हो शहर की सड़को पर ,
आग के दरिये में यूँ घी बहाया ना करो ।
नफरत की ज्वाला में जलती रही सरहदें ,
तपाक से उनको यूँ गले लगाया ना करो ।
देख ली हो रंगत वफाओं जफाओं की ,
दिल दे ना गवाही हाथ मिलाया ना करो ।
सदियों से सपने लूटकर करते रहे राज ,
तुम हवाओं में बस्तियाँ बसाया ना करो ।
"जय कुमार" 27/04/14
जले दीपकों को ऐसे बुजाया ना करो ।
शक्ति का समुंदर समाया तेरे अंदर ,
अपनी हिम्मत को ऐसे मिटाया ना करो ।
जिसमें ना रह पाये एक साथ दो भाई ,
कच्चे धागों के ऐसे घर बनाया ना करो ।
जिस जश्न में मुहब्बत ना दिखे यारो ,
महफिलों को फिर ऐसीं सजाया ना करो ।
इंसान की फितरत इंसान ही पड़ लेता ,
मजहब के नाम पर आग लगाया ना करो ।
भूखे बच्चे रोते हो शहर की सड़को पर ,
आग के दरिये में यूँ घी बहाया ना करो ।
नफरत की ज्वाला में जलती रही सरहदें ,
तपाक से उनको यूँ गले लगाया ना करो ।
देख ली हो रंगत वफाओं जफाओं की ,
दिल दे ना गवाही हाथ मिलाया ना करो ।
सदियों से सपने लूटकर करते रहे राज ,
तुम हवाओं में बस्तियाँ बसाया ना करो ।
"जय कुमार" 27/04/14
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