तेरी तस्वीर आँखो में बसा रखी है ।
हरेक बात जिह्न में बिठा रखी है ।
तुझको भूलकर जीना संभव कहाँ ,
मैंने हर टीस दिल में दबा रखी है ।
"जय कुमार" 01/05/14
हरेक बात जिह्न में बिठा रखी है ।
तुझको भूलकर जीना संभव कहाँ ,
मैंने हर टीस दिल में दबा रखी है ।
"जय कुमार" 01/05/14
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