Monday, 12 May 2014

गोद में तेरी

गोद में तेरी
सोया तो जन्नत भी
कम लगी माँ

तुझे जो पाया
हरेक मन्नत भी
कम लगी माँ

सिलवट जो
देखी तेरी आँखे भी
नम लगी माँ

जग जननी
पालन करती हो
रब सम माँ

तेरे आँचल
की छाँव सुकुन का
सागर है माँ

ज्येष्ठ की गर्मी
तेज धूप आग में
हिमालय माँ

शांत धारा हो
गंगा की यमुना में
समायी हो माँ

जर्रा जर्रा में
ममता तेरे भरी
मेघ धारा माँ

वात्सल्य मूर्ति
राम महावीर में
भी बसी हो माँ

ईश्वर पूजा
करते जिसे मेरी
वो है प्यारी माँ

मेरा वंदन
कोटिश नमन है
जगत की माँ


"जय कुमार" 11/05/14

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