गोद में तेरी
सोया तो जन्नत भी
कम लगी माँ
तुझे जो पाया
हरेक मन्नत भी
कम लगी माँ
सिलवट जो
देखी तेरी आँखे भी
नम लगी माँ
जग जननी
पालन करती हो
रब सम माँ
तेरे आँचल
की छाँव सुकुन का
सागर है माँ
ज्येष्ठ की गर्मी
तेज धूप आग में
हिमालय माँ
शांत धारा हो
गंगा की यमुना में
समायी हो माँ
जर्रा जर्रा में
ममता तेरे भरी
मेघ धारा माँ
वात्सल्य मूर्ति
राम महावीर में
भी बसी हो माँ
ईश्वर पूजा
करते जिसे मेरी
वो है प्यारी माँ
मेरा वंदन
कोटिश नमन है
जगत की माँ
"जय कुमार" 11/05/14
सोया तो जन्नत भी
कम लगी माँ
तुझे जो पाया
हरेक मन्नत भी
कम लगी माँ
सिलवट जो
देखी तेरी आँखे भी
नम लगी माँ
जग जननी
पालन करती हो
रब सम माँ
तेरे आँचल
की छाँव सुकुन का
सागर है माँ
ज्येष्ठ की गर्मी
तेज धूप आग में
हिमालय माँ
शांत धारा हो
गंगा की यमुना में
समायी हो माँ
जर्रा जर्रा में
ममता तेरे भरी
मेघ धारा माँ
वात्सल्य मूर्ति
राम महावीर में
भी बसी हो माँ
ईश्वर पूजा
करते जिसे मेरी
वो है प्यारी माँ
मेरा वंदन
कोटिश नमन है
जगत की माँ
"जय कुमार" 11/05/14
sadar
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