Wednesday, 7 May 2014

टूटे ख्वाबों

टूटे ख्वाबों की कसक खूब होती है ।
साख से बिछड़ पत्तियाँ खूब रोती है ।
भँवर पास हो साहिल हो दूर तब ,
माँझी के साथ कस्तियाँ खूब रोती है ।

"जय कुमार"  28/04/14

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