टूटे ख्वाबों की कसक खूब होती है ।
साख से बिछड़ पत्तियाँ खूब रोती है ।
भँवर पास हो साहिल हो दूर तब ,
माँझी के साथ कस्तियाँ खूब रोती है ।
"जय कुमार" 28/04/14
साख से बिछड़ पत्तियाँ खूब रोती है ।
भँवर पास हो साहिल हो दूर तब ,
माँझी के साथ कस्तियाँ खूब रोती है ।
"जय कुमार" 28/04/14
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