खुली किताब हूँ पड़ना ना सीखा तुमने ।
प्रेम का सागर हूँ पाना ना सीखा तुमने ।
मंजिल कैसें ना मिलती तुझको मेरे यार ,
मुकम्मल राह हूँ चलना ना सीखा तुमने ।
"जय कुमार" 29/05/14
प्रेम का सागर हूँ पाना ना सीखा तुमने ।
मंजिल कैसें ना मिलती तुझको मेरे यार ,
मुकम्मल राह हूँ चलना ना सीखा तुमने ।
"जय कुमार" 29/05/14
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