पँछी की उड़ान वही होगी
चाहे बदल दो आकाश ।
उल्लु की प्रकृति ना बदलेगी
चाहे बदल दो प्रकाश ।
होने ना होने का अंतर बस
जिसे समझना है यारो ,
शीरत ना बदलेगी कभी यहाँ
चाहे बदल दो लिबास ।
"जय कुमार"१८ /०६ /१४
चाहे बदल दो आकाश ।
उल्लु की प्रकृति ना बदलेगी
चाहे बदल दो प्रकाश ।
होने ना होने का अंतर बस
जिसे समझना है यारो ,
शीरत ना बदलेगी कभी यहाँ
चाहे बदल दो लिबास ।
"जय कुमार"१८ /०६ /१४
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