ये कुछ कर गुजरने के दिन है ।
खुद से बात करने के दिन है ।
बातें बहुत हो चुकी मेरे मित्रो ,
हकीकत से मिलने के दिन है ।
मुलाकातों का दौर खत्म हुआ ,
अब दिल में उतरने के दिन है ।
कहाँ फँसे इतिहास के पन्नों में ,
अब नये ख्वाव देखने के दिन है ।
किसको बददुआ दे अब यारो ,
अपने आप से मिलने के दिन है ।
मजहब के नाम पर ना टूटो ,
ये एक साथ बढ़ने के दिन है ।
रुख बदला अब हवाओं ने ऐसे ,
मन मीत से मिलने के दिन है ।
"जय कुमार"31/05/14
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