Sunday, 8 June 2014

gazal


ये कुछ कर गुजरने के दिन है ।
खुद से बात करने के दिन है ।

बातें बहुत हो चुकी मेरे मित्रो ,
हकीकत से मिलने के दिन है ।

मुलाकातों का दौर खत्म हुआ ,
अब दिल में उतरने के दिन है ।

कहाँ फँसे इतिहास के पन्नों में ,
अब नये ख्वाव देखने के दिन है ।

किसको बददुआ दे अब यारो ,
अपने आप से मिलने के दिन है ।

मजहब के नाम पर ना टूटो ,
ये एक साथ बढ़ने के दिन है ।

रुख बदला अब हवाओं ने ऐसे ,
मन मीत से मिलने के दिन है ।

"जय कुमार"31/05/14

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