Thursday, 19 June 2014

मेरी आँखो को

गुजरे जमाने की यादेँ ,
मेरी आँखो को ,
बरसात दें गईं . .
दिल में पलते ख्वावों को ,
एक पल में लें गईं . . .

कल तक थे जो मेरे साथी ,
हर पल साथ निभाते थे ।
कल तक थे हम तेल और बाती ,
एक दूजे पर मिट जाते थे ।
ऐसी आईं कातिल हवाये ,
मेरी बस्ती को ,
बर्बाद कर गईं . . .

गुजरे जमाने की यादेँ ,
मेरी आँखो को ,
बरसात दें गईं . . .
दिल में पलते ख्वावों को ,
एक पल में लें गईं . .

"जय कुमार"१८ /०६ /१४ 

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