कोई सबकुछ पाकर भी मचलता है ।
काँटों , कीचड़ में भी फूल खिलता है ।
हयात की विसात क्या है मेरे मित्रो ,
कजा के आगे किसका जोर चलता है ।
"जय कुमार"9/06/14
काँटों , कीचड़ में भी फूल खिलता है ।
हयात की विसात क्या है मेरे मित्रो ,
कजा के आगे किसका जोर चलता है ।
"जय कुमार"9/06/14
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