मुहब्बत जीत जायेगी तुम जो साथ दो ।
रुत हँसेंगी शक की जंजीर जो काट दो ।
रुठकर क्या मिला तन्हाई के सिवा यार ,
फासले मिट जायेंगे बढ़कर जो हाथ दो ।।
रुत हँसेंगी शक की जंजीर जो काट दो ।
रुठकर क्या मिला तन्हाई के सिवा यार ,
फासले मिट जायेंगे बढ़कर जो हाथ दो ।।
"जय कुमार"15/05/15
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