खुशी के गीत गाकर मुस्कराते ,
दर्द दिल का तुम छुपाते क्यों हो ।
आसमाँ से रोशनी पाई हमने ,
धरती का कर्ज बताते क्यों हो ।
दर्द दिल का तुम छुपाते क्यों हो ।
आसमाँ से रोशनी पाई हमने ,
धरती का कर्ज बताते क्यों हो ।
धूप छाँव में जिंदगी रहती तेरी ,
बुतों को मर्ज यूँ सुनाते क्यों हो ।
राज राज कब रहे जमाने में ,
लोगों को राजदाँ बनाते क्यों हो ।
पत्थरो से दिल हुए जमाने के ,
फूलों की कहानी सुनाते क्यों हो ।
रात हिज्र की तन्हाई का आलम ,
तमन्ना ए चिराग जलाते क्यों हो ।
मौत आयेगी स्वागत हो उसका ,
हसीन पल जय मिटाते क्यों हो ।
"जय कुमार"12/04/15
बुतों को मर्ज यूँ सुनाते क्यों हो ।
राज राज कब रहे जमाने में ,
लोगों को राजदाँ बनाते क्यों हो ।
पत्थरो से दिल हुए जमाने के ,
फूलों की कहानी सुनाते क्यों हो ।
रात हिज्र की तन्हाई का आलम ,
तमन्ना ए चिराग जलाते क्यों हो ।
मौत आयेगी स्वागत हो उसका ,
हसीन पल जय मिटाते क्यों हो ।
"जय कुमार"12/04/15
No comments:
Post a Comment