Mere Bhav
Sunday, 17 May 2015
प्रेम नगरिया
प्रेम नगरिया लुट रही , लुट गये रिश्ते आज ।
वासना के जाल प्रबल , खुदगरजी के काज ।।
"जय कुमार"
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment