Sunday, 17 May 2015

बैसाख आया

बैसाख आया
बरसात है लाया
गर्मी भूलके
प्रकृति रुष्ठ
काल परिवर्तन
टूटता चक्र

हरेक दिन
हर रात बदली
बदली हवा
बीज का जन्म
कृषि उपज कहाँ
मृत मौसम
"जय कुमार"18/04/15

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