Sunday, 17 May 2015

समुन्दर रेत के

समुन्दर रेत के कस्ती ले चला था ।
दिल न थे जिनके उनसे गिला था ।
नजर नहीं आता रोशनी पास थी ,
अँधेरों के उस उजाले से मिला था ।।
"जय कुमार"31/03/15

No comments:

Post a Comment