खुदा तेरा नूर अगर सब में समाया है ,
जिंदगियों में यूँ अँधेरा घनेरा न होता ।
रहम अगर बरसती रहनुमा की यारों ,
पसीने कि रोटी में दर्द का बसेरा न होता ।
जिंदगियों में यूँ अँधेरा घनेरा न होता ।
रहम अगर बरसती रहनुमा की यारों ,
पसीने कि रोटी में दर्द का बसेरा न होता ।
"जय कुमार"29/04/15
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