चारों तरफ शहर में अँधेरा छाया है ।
बेकसूर कोई गुनहगार ठहराया है ।
मर्ज ए दर्द सजे होंगे फिर बस्ती में ,
किसी मासूम का जनाजा उठाया है ।।
बेकसूर कोई गुनहगार ठहराया है ।
मर्ज ए दर्द सजे होंगे फिर बस्ती में ,
किसी मासूम का जनाजा उठाया है ।।
"जय कुमार"3/4/15
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