मन मोहन मन में बसे , मन के बने मनमीत ।
बिखरा विष इस तन से , अमृत सी जा प्रीत ।
अमृत सी जा प्रीत , गीत प्रेम के नित गावे ।
पाकर हरि के पाँव , छाँव हियरे में पावे ।।
बिखरा विष इस तन से , अमृत सी जा प्रीत ।
अमृत सी जा प्रीत , गीत प्रेम के नित गावे ।
पाकर हरि के पाँव , छाँव हियरे में पावे ।।
"जय कुमार"2/04/15
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