Sunday, 17 May 2015

फरेब की बिसात

फरेब की बिसात तुम बिछाते क्यों हो ?
फितरत मासूमियत से छिपाते क्यों हो ?
हर पल साथ रहे साथ रहेगे हम तुम ,
जुनून ऐ मुहब्बत तुम दिखाते क्यों हो ?
रोज - रोज ही अँधेरा देखते चारो ओर ,
रोशनी की किरणे तुम बुलाते क्यों हो ?
कद्र नही की दर्द ऐ दिल कि कभी यार ,
मुहब्बत के कद्रदान मुझे बनाते क्यों हो ?
दामन उस बेमुरब्बत यार ने छुटाया था ,
अश्क के दरिया तुम अब बहाते क्यों हो ?
वागवान ने लूटा था कलियों का वसेरा ,
सूखे हुए फूलों को अब खिलाते क्यों हो ?
सारे सपने धराशाही हुए प्यार में तेरे ,
मेरे सपनों में आकर तुम रुलाते क्यों हो ?
बिछड़े जमाने हुए चेहरे भी धूमिल हुए ,
बिछड़े हुए दर्दो को जय मिलाते क्यों हो ?
"जय कुमार"4/4/15

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