Mere Bhav
Sunday, 17 May 2015
पत्थरों पर
पत्थरों पर उसका नाम न लिख
सदियों का प्रेम बदनाम न लिख
दिल का दर्द बयाँ करने के लिए
शौक तेरा उसका जाम न लिख
रब से पाया अदा कर दे उसको
जिंदगी में अपनी हराम न लिख
शब्दों को जोड़ता है जय नादान
दिल को न लगे कलाम न लिख
"जय कुमार"23/04/15
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