खो गई संवेदनाये मानवता के देश में ।
रो गई अवलाये सियासत के संदेश में ।
वागवान ने जब फूलों की अस्मत लूट ली ,
घर सुरक्षित न रहा आज के परिवेश में ।।
रो गई अवलाये सियासत के संदेश में ।
वागवान ने जब फूलों की अस्मत लूट ली ,
घर सुरक्षित न रहा आज के परिवेश में ।।
"जय कुमार"20/04/15
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