मेहनत के हाथ रहे , नयन से बहे खून ।
हाथ में कुदाली रही , तब रोटी दो जून ।
तब रोटी दो जून , जीवन यूँ बढ़ता रहा ।
राह में रहे शूल , फूलों का घेरा सहा ।।
हाथ में कुदाली रही , तब रोटी दो जून ।
तब रोटी दो जून , जीवन यूँ बढ़ता रहा ।
राह में रहे शूल , फूलों का घेरा सहा ।।
"जय कुमार"24/05/15
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