Mere Bhav
Tuesday, 26 May 2015
जिंदगी एक
जिंदगी एक खुली किताब बना ।
रोशनी बिखेरता आफताब बना ।
फिसलन न रहे तेरे दामन में यार ,
उलझे ना कोई वो हिसाब बना ।।
"जय कुमार"
20/05/15
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment