Sunday, 17 May 2015

किसी मंदिर

किसी मंदिर किसी मस्जिद के दर बैठा ।
कभी इसके तो कभी उसके घर बैठा ।
देख सका ना ह्रदय , मैं स्वंय अपना ही ,
जिसमें ईश्वर अल्लाह जिंदगी भर बैठा ।।
"जय कुमार"9/4/15

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