Tuesday, 1 April 2014

यह क्या हो रहा

यह क्या हो रहा है , यह क्यों हो रहा है
जुड़कर तुं मुझसे , क्यों जुदा हो रहा है

खुशबु बनकर आया , तुं मेरी जिंदगी में ,
चाहत बढ़ाकर क्यों यूँ , नासूर हो रहा है।

मुझे जुनूने वफ़ा की , राहो में चलाकर ,
महफिलों में जाकर यूँ , बेआबरू हो रहा है।

मुझे जलजलों का खौफ , रहा कहाँ अब  ,
मेरा यार ही जब यूँ  , क़यामत हो रहा है।
 
धरा पर आया , तूं इंसान की औलाद है ,
अब क्यों  इतना ,यूँ  मगरूर हो रहा है।

"जय  कुमार"  


 
  

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