क्यों तु अपने वादों से मुकर गया ।
मैं टूटे आईने की तरह बिखर गया ।
हिज्र में जीना मजबूरी बन गई मेरी ,
मुझे छोड़ तु ना जाने किधर गया ।
"जय कुमार" 25/04/14
मैं टूटे आईने की तरह बिखर गया ।
हिज्र में जीना मजबूरी बन गई मेरी ,
मुझे छोड़ तु ना जाने किधर गया ।
"जय कुमार" 25/04/14
No comments:
Post a Comment