Thursday, 24 April 2014

कुछ वयान तुम

कुछ वयान तुम करो कुछ हम करें ।
मिलकर इस जहां में बसर हम करें ।

जहर पिये जामें जिंदगी के हमने ।
बिखरकर क्या पाया अब तलक हमने ।
अब राहें एक करले हम दोनों यार ,
कुछ बरम तुम करो कुछ हम करें ।

महफिलें सजी रही जमाने में हम तन्हा ।
मिलते रहे मौसम एक दूजे से हम तन्हा ।
हम दोनों मुहब्बत का घर बनायेँ ,
कुछ करम तुम करो कुछ हम करें ।

"जय कुमार " 23/04/14

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