कुछ वयान तुम करो कुछ हम करें ।
मिलकर इस जहां में बसर हम करें ।
जहर पिये जामें जिंदगी के हमने ।
बिखरकर क्या पाया अब तलक हमने ।
अब राहें एक करले हम दोनों यार ,
कुछ बरम तुम करो कुछ हम करें ।
महफिलें सजी रही जमाने में हम तन्हा ।
मिलते रहे मौसम एक दूजे से हम तन्हा ।
हम दोनों मुहब्बत का घर बनायेँ ,
कुछ करम तुम करो कुछ हम करें ।
"जय कुमार " 23/04/14
मिलकर इस जहां में बसर हम करें ।
जहर पिये जामें जिंदगी के हमने ।
बिखरकर क्या पाया अब तलक हमने ।
अब राहें एक करले हम दोनों यार ,
कुछ बरम तुम करो कुछ हम करें ।
महफिलें सजी रही जमाने में हम तन्हा ।
मिलते रहे मौसम एक दूजे से हम तन्हा ।
हम दोनों मुहब्बत का घर बनायेँ ,
कुछ करम तुम करो कुछ हम करें ।
"जय कुमार " 23/04/14
No comments:
Post a Comment