राई का पहाड़ बनते देखा ।
विद्धानों को उवलते देखा ।
ईमान को हाथ जोड़ते देखा ।
वेईमान को ऐंड़ते देखा ।
हंस को दाना चुनते देखा ।
अमीर को तंगहाल होते देखा ।
अरमानों को मचलते देखा ।
ख्वावो को कुचलते देखा ।
आँसुओं में प्यार पलते देखा ।
किसी की कमी खलते देखा ।
आज में भी कल आते देखा ।
कल में भी आज जाते देखा ।
मजबूरी में इंसां बिकते देखा ।
गरीब को नीँद सोते देखा ।
धनी चिँता में जागते देखा ।
यहाँ जहर बीज बोते देखा ।
मुहब्बत को सदा रोते देखा
खून के रिश्तों को टूटते देखा ।
यहाँ भरोसा को लुटते देखा ।
लालच को हाथ मलते देखा ।
मौत के बाद मौत होते देखा ।
बुढ़ापे में बचपन खेलते देखा ।
जवानी मेँ मगरुर होते देखा ।
अहं की आग में डूबते देखा ।
नमन उगते को होते देखा ।
शेर को शियार होते देखा ।
प्यार को धुत्तकारते देखा ।
दिल मंदिर स्वीकारते देखा ।
तारो को रोज निहारते देखा ।
सूरज को भी डूबते देखा ।
आयु की साँझ आते देखा ।
सिकंदर को भी जाते देखा ।
यीशु को दोबारा आते देखा ।
गूँगे को गीत गाते देखा ।
पँगु को पहाड़ चढ़ते देखा ।
अंधे को सौंदर्य निहारते देखा ।
शूरवीर को रण छोड़ते देखा ।
महावीर को देह त्यागते देखा ।
"जय कुमार" 05/04/14
विद्धानों को उवलते देखा ।
ईमान को हाथ जोड़ते देखा ।
वेईमान को ऐंड़ते देखा ।
हंस को दाना चुनते देखा ।
अमीर को तंगहाल होते देखा ।
अरमानों को मचलते देखा ।
ख्वावो को कुचलते देखा ।
आँसुओं में प्यार पलते देखा ।
किसी की कमी खलते देखा ।
आज में भी कल आते देखा ।
कल में भी आज जाते देखा ।
मजबूरी में इंसां बिकते देखा ।
गरीब को नीँद सोते देखा ।
धनी चिँता में जागते देखा ।
यहाँ जहर बीज बोते देखा ।
मुहब्बत को सदा रोते देखा
खून के रिश्तों को टूटते देखा ।
यहाँ भरोसा को लुटते देखा ।
लालच को हाथ मलते देखा ।
मौत के बाद मौत होते देखा ।
बुढ़ापे में बचपन खेलते देखा ।
जवानी मेँ मगरुर होते देखा ।
अहं की आग में डूबते देखा ।
नमन उगते को होते देखा ।
शेर को शियार होते देखा ।
प्यार को धुत्तकारते देखा ।
दिल मंदिर स्वीकारते देखा ।
तारो को रोज निहारते देखा ।
सूरज को भी डूबते देखा ।
आयु की साँझ आते देखा ।
सिकंदर को भी जाते देखा ।
यीशु को दोबारा आते देखा ।
गूँगे को गीत गाते देखा ।
पँगु को पहाड़ चढ़ते देखा ।
अंधे को सौंदर्य निहारते देखा ।
शूरवीर को रण छोड़ते देखा ।
महावीर को देह त्यागते देखा ।
"जय कुमार" 05/04/14
No comments:
Post a Comment