Friday, 11 April 2014

कलिका कोमल कामिनी

कलिका कोमल कामिनी कर ले श्रृँगार ।
कँगण कर्णफूल से कर कानन ले सँवार ।
ठुमक चलन से तेरी घायल हुआ संसार ,
मन मोहनी मन बसी नयनोँ की ले कटार ।।

जय कुमार 10/04/14

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