Monday, 7 April 2014

कल फिर कमाल

कल फिर कमाल हो गया ।
मेरा दिल कहीं खो गया ।

ख्वाबो में बसा था हमारे ,
उसका ही दीदार हो गया ।

कहीँ पर रब का घर भी है
हमें अब यकीन हो गया ।

शिद्दत से चाहा हमने जिसे ,
मुझसे अब वो रुबरु हो गया ।

मगरुर के घर में यारो कल ,
पैदा मुहब्बते नूर हो गया ।

देखकर मुफलिसी उसकी ,
अमीर का दिल मोम हो गया ।

दीवाना बन घूँमा बाजारों में ,
जालिम को भी प्यार हो गया ।

उसके हुस्न का जादु तो देखो ,
पानी भी शराब हो गया ।

जब चले राहों मेँ ठुमकके वो ,
लोगों का दिल बेकार हो गया ।

जय कुछ तो नया लिख अब ,
जमाना अब जानकार हो गया ।

"जय कुमार" 04/04/14

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