Friday, 4 April 2014

कमल की तरह

कमल की तरह खिला चेहरा , आज मुरझाया क्यों है ।
तु मेरे करीब रहकर भी मुझसे , अब पराया क्यों है ।
टूटता कभी भी नहीं , यह जज्बात का रिश्ता ,
अपने दिल में बिठाकर मुझे , आज भुलाया क्यों है ।

"जय कुमार" 04/04/14

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