अक्सर झूठ , इमारत उँची बना लेता है ।
अक्सर अँधेरा , रास्तोँ को छुपा देता है ।
नींव कमजोर हो तो टिकता नहीं कोई ,
किरण एक भोर की , तम को मिटा देता है ।
"जय कुमार" 24/04/14
अक्सर अँधेरा , रास्तोँ को छुपा देता है ।
नींव कमजोर हो तो टिकता नहीं कोई ,
किरण एक भोर की , तम को मिटा देता है ।
"जय कुमार" 24/04/14
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