Tuesday, 8 April 2014

अब राम तुमारे देश में

मर्यादायें सब बिखर रहीं ,
अब राम तुमारे देश में।
मेघ कुम्भकरण रावण बैठे ,
आज राम के भेष में।

मंदिरो में सिमित हो गए।
शास्त्रो में सिमित रह गए।
नाम राम का लेते रहते सब ,
आज स्वार्थ उपदेश में।

करके काले काम उपासक।
लेते हर दम नाम उपासक।
काली करतूतो पर अपनी ,
राम चुनरिया तेरे देश में।

सबरी रोती सीता भी रोती।
गीता रोती उर्मिला भी रोती।
कोई बचावन वाला नहीं है ,
अब राम तुमारे देश में।

माँ कि ममता प्रेम पिता का।
धूमिल प्रेम  बहिन भाई का।  
कौसल्या पर कहर डा रहे ,
अब राम तुमारे देश में।
 
नीति राजनीति ख़त्म हो रही।
स्वार्थ नीति कि शुरुवात हो रही।
सत्य असत्य का बोध नहीं ,
अब राम तुमारे देश में।

मानव दानवता कि ओर चला।
पूरब  पश्चिम कि ओर  चला।
सच्चाई अच्छाई आँसू बहाती ,
अब राम तुमारे देश में।

"जय कुमार" ०८ /०४ /१४

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