दीवाना बन घूमता हूँ तेरे शहर में ।
सहम जाता हूँ मैं अब तेरे कहर में ।
मुहब्बत की कोई गुनाह ना किया ,
टूटता जा रहा हूँ अब हर पहर में ।
"जय कुमार" 23/04/14
सहम जाता हूँ मैं अब तेरे कहर में ।
मुहब्बत की कोई गुनाह ना किया ,
टूटता जा रहा हूँ अब हर पहर में ।
"जय कुमार" 23/04/14
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