बेटे रहते महलों में ,
माँ वृध्दाश्रम में रोती है ।
हर दिन वह अपना आँचल ,
अपने आँसुओं से धोती है ।
कहाँ गये तुम कृष्ण कन्हैया ,
रोती आज तुम्हारी मैया ।
जरा वृन्द्रावन आके देखो ,
देवकी दशोदा कैंसी रोती है
बेटे रहते महलों मेँ ,
माँ वृध्दाश्रम में रोती है ।
"जय कुमार"
माँ वृध्दाश्रम में रोती है ।
हर दिन वह अपना आँचल ,
अपने आँसुओं से धोती है ।
कहाँ गये तुम कृष्ण कन्हैया ,
रोती आज तुम्हारी मैया ।
जरा वृन्द्रावन आके देखो ,
देवकी दशोदा कैंसी रोती है
बेटे रहते महलों मेँ ,
माँ वृध्दाश्रम में रोती है ।
"जय कुमार"
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