Thursday, 24 April 2014

तेरे शहर के

तेरे शहर के परिंद्रे भी ,
पहचान गये मुझे ।
तेरे शहर के रास्ते भी ,
पहचान गये मुझे ।
बस तू ही ना जाने क्यों
अनजान बनता है ,
तेरे शहर के अनजां भी ,
पहचान गये मुझे ।

"जय कुमार" 23/04/14

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