ये जमाने तेरी रवायत समझ ना पाया ।
चलने वालों के पैरों में फफोले दिये है ,
बैठने वालों ने ही क्यों आराम पाया ।
प्यार फूल मुरझाये नफरत के काँटे उगे ,
जख्मों के साये में मुहब्बत को पाया ।
जय कुमार 19/04/14
चलने वालों के पैरों में फफोले दिये है ,
बैठने वालों ने ही क्यों आराम पाया ।
प्यार फूल मुरझाये नफरत के काँटे उगे ,
जख्मों के साये में मुहब्बत को पाया ।
जय कुमार 19/04/14
No comments:
Post a Comment