Monday, 7 April 2014

वो सब वादे

प्यार वफा के वो सब वादे ,
बिकते आज बाजारों में ।
रोज नये इस्तिहार निकलते ,
मेरे शहर के अखवारों में ।
खोकर पाता जो दिल मेरा ,
यकीन करता बहारों में ।
स्वार्थ बनता जब मिलन है ,
फिरता फिर आवारों में ।
कल तक साथ रहा जो मेरे ,
मिलता आज नजारों में ।
दीवाना में होकर जो भटका,
नाम दे दिया बेगारों में ।
प्यार वफा के वो सब वादे ,
बिकते आज बाजारों में ।
रोज नये इस्तिहार निकलते ,
मेरे शहर के अखवारों में ।।

"जय कुमार" 05/04/14

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