Monday, 21 April 2014

नजरिया बदल गया

नजरिया बदल गया जाने ,
क्या क्या देखते हो तुम ।
क्या कुछ बचा नही अब
स्वार्थ की तराजु के लिए ,
मुहब्बत में भी क्या अब ,
नफा नुकसान देखते हो तुम ।

जय कुमार 20/04/14

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