नजरिया बदल गया जाने ,
क्या क्या देखते हो तुम ।
क्या कुछ बचा नही अब
स्वार्थ की तराजु के लिए ,
मुहब्बत में भी क्या अब ,
नफा नुकसान देखते हो तुम ।
जय कुमार 20/04/14
क्या क्या देखते हो तुम ।
क्या कुछ बचा नही अब
स्वार्थ की तराजु के लिए ,
मुहब्बत में भी क्या अब ,
नफा नुकसान देखते हो तुम ।
जय कुमार 20/04/14
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