Tuesday, 5 November 2013

MERE BHAV

पानी पानी हो गया , 
साँवन मैँ चारो ओर । 
धरा ने ओढी हरि चुनरिया , 
वन मैँ नाचे मोर ।। 
"जय"  21/08/2013


जोगी तेरे खटकर्म से , 
शर्मिदा है तेरा जोग । 
विठ्ठल्ला की भक्ति मैँ , 
कैसे सीखा तुने भोग ।। 
"जय" 22

मोरो जो बुँदेलखण्ड , 
सारी दुनिया से न्यारो । 
लक्ष्मीबाई सी बिटिया ,
जाको छत्रसाल बेटा प्यारो ।। 
"जय" 24

मेरा मन मुझको , 
टटोलता है , 
मुझसे ही सवाल करता , 
मुझे ही कटघरे मैँ खड़ा करता , 
दोषी सावित करता , 
फैसला देता , 
और मानने मानने पर , 
मजबूर करता । 22


टूटने की आवाज , 
ना सुनी , 
गिरने की आवाज , 
ना सुनी , 
एक हवा का , 
झोँका होगा , 
शायद , 
पत्ते की उड़ने , 
को महसूस किया बस । 
"जय" सुप्रभात 23


रिमझिम बारिष थम गई , 
जब साँवन विदा हो जाय । 
अब भादोँ ने दस्तक दी , 
ज्योँ बर्षा गई बुढ़ाय । । 
"जय"  23



मेरी उम्मीद से भी , 
तुम कहीँ ज्यादा निकले । 
हम बेवफा समझते थे ,
तुम तो मेरे कातिल निकले ।। 
"जय" शुभरात्रि 23 
कब तक धर्म की आड़ मैँ , 
करते रहोगे काले काम । 
कब तक ईश्वर को बेँचोगे , 
चौराहो पर लेकर दाम ।। 
अब बात निकल पड़ी है , 
आस्था से निकला है नाग , 
तेरे विश्वास की दौलत को , 
कुछ करते है अब बदनाम. . 
राम रहीम का धंधा करते , 
दाम काम मैँ वो है भरते , 
तू डरता इनके पखंडो से , 
यहाँ तेरी मेहनत तेरा दाम. . . .
"जय"  30

प्रेम की खुशबु कोदूरियाँ , 
कब कम कर पाई है। 
साथ रहकर भी दूर लगते , 
किसी ने दूर से मँजिल पाई है ।। 
"जय" शुभरात्रि सम्मानीय मित्रो    31


जीवन उन राहो का नाम , 
जिनमे संघर्ष अपार। 
कुछ ऐसा कर गुजरेँ , 
जो हो जीवन के पार ।। 
"जय 31


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