जयराम धागा प्रेम का ,
यदि अगर टूट जाए ।
अबकी ऐसे जोड़िए ,
तोड़े से तोड़ा ना जाए ।।
"जय"12/08/2013
मुझपर इल्जाम क्योँ लगाते हो दोस्त ?
तुम्हारी शोहरत ने ही तुमको लूटा होगा . . .
एक वार पीछे मुड़कर तो देखा होता ,
मै तो परछाई बनकर चल रहा था ,
तुम्हारे अक्स ने ही तुमको लूटा होगा . . .
"जय" शुभ 12/०८ /१३
जब तन मैँ चुभी हुई थी गोलियाँ ,
टूट रही थी उनकी साँसे ,
वो वोल रहे थे इंकलाब की बोलिया . . .
सरहद पर अपना खून बहाकर ,
दुश्मन पर गुर्राते हैँ जब वो ,
तब हम उठा पाते हैँ ,
बहु बेटियोँ की डोलियाँ . . .
हिमालय के विराट सीने पर ,
खड़े हुए हैँ वो अटल ,
हिँद के मस्तक का चंदन बनकर ,
तब हम अपने घर मैँ ,
कर पाते हैँ ठिठोलियाँ . . .
उन वीर जवानो को जय करता ,
कोटि कोटि प्रणाम है ,
जो सरहद पर बोले वन्दे मातरम् की बोलियाँ . . .
"जय" 14 ०८ १३
सियासत करने वाले ,
आज भी ना चूँके अपने वार से ।
इस शुभ दिन भी बो ,
सिर मारते रहे दीवार से ।।
"जय" 15
जहाँ की वीरता की गाथायेँ ,
गाये सारा जहान ।
हिँदुस्तान की जान है ये ,
यह मारो राजस्थान ।।
"जय" 17
अनजान वनने की इतनी ,
जद्दोजहत करते हो दोस्त ,
इससे अच्छा है क्योँ ना
एक वार फिर ,
जान पहचान कर लेँ . . .
"जय" 17
मैने तो तुझको रुह मै वसा लिया है ,
साँसो मैँ वसाने वाले तो,
साँस बँद होते ही चले जाया करते है दोस्त. . .
"जय" 17
का कहेँ भैया आज तौ ,
मोरी जारई जान ।
प्याज के लाने ब्याज के पैसा ,
अब कैसे खावै पान । ।
"जय" 17
यह भारत भूमि करती आज बहन को
प्रणाम है . . . .
आज इस पवित्र रिस्ते का करते हम ,
सम्मान है . . . .
जब हर पल करता रक्षा बहिन की ,
आज बहिन को अपने भाई पर होता ,
अभिमान है . . . .
जब तक सितारो मैँ रोशनी ,
तब तक भाई बचायेगा बहिन का,
स्वाभिमान है . . . .
"जय" रक्षाबँधन की सभी को शुभकामनाएँ . 20
यदि अगर टूट जाए ।
अबकी ऐसे जोड़िए ,
तोड़े से तोड़ा ना जाए ।।
"जय"12/08/2013
मुझपर इल्जाम क्योँ लगाते हो दोस्त ?
तुम्हारी शोहरत ने ही तुमको लूटा होगा . . .
एक वार पीछे मुड़कर तो देखा होता ,
मै तो परछाई बनकर चल रहा था ,
तुम्हारे अक्स ने ही तुमको लूटा होगा . . .
"जय" शुभ 12/०८ /१३
जब तन मैँ चुभी हुई थी गोलियाँ ,
टूट रही थी उनकी साँसे ,
वो वोल रहे थे इंकलाब की बोलिया . . .
सरहद पर अपना खून बहाकर ,
दुश्मन पर गुर्राते हैँ जब वो ,
तब हम उठा पाते हैँ ,
बहु बेटियोँ की डोलियाँ . . .
हिमालय के विराट सीने पर ,
खड़े हुए हैँ वो अटल ,
हिँद के मस्तक का चंदन बनकर ,
तब हम अपने घर मैँ ,
कर पाते हैँ ठिठोलियाँ . . .
उन वीर जवानो को जय करता ,
कोटि कोटि प्रणाम है ,
जो सरहद पर बोले वन्दे मातरम् की बोलियाँ . . .
"जय" 14 ०८ १३
सियासत करने वाले ,
आज भी ना चूँके अपने वार से ।
इस शुभ दिन भी बो ,
सिर मारते रहे दीवार से ।।
"जय" 15
जहाँ की वीरता की गाथायेँ ,
गाये सारा जहान ।
हिँदुस्तान की जान है ये ,
यह मारो राजस्थान ।।
"जय" 17
अनजान वनने की इतनी ,
जद्दोजहत करते हो दोस्त ,
इससे अच्छा है क्योँ ना
एक वार फिर ,
जान पहचान कर लेँ . . .
"जय" 17
मैने तो तुझको रुह मै वसा लिया है ,
साँसो मैँ वसाने वाले तो,
साँस बँद होते ही चले जाया करते है दोस्त. . .
"जय" 17
का कहेँ भैया आज तौ ,
मोरी जारई जान ।
प्याज के लाने ब्याज के पैसा ,
अब कैसे खावै पान । ।
"जय" 17
यह भारत भूमि करती आज बहन को
प्रणाम है . . . .
आज इस पवित्र रिस्ते का करते हम ,
सम्मान है . . . .
जब हर पल करता रक्षा बहिन की ,
आज बहिन को अपने भाई पर होता ,
अभिमान है . . . .
जब तक सितारो मैँ रोशनी ,
तब तक भाई बचायेगा बहिन का,
स्वाभिमान है . . . .
"जय" रक्षाबँधन की सभी को शुभकामनाएँ . 20
No comments:
Post a Comment