गौतम गाय गाँधी के देश मेँ अब ,
गौधन पर छुरी चलाई जाती है . .
खून पानी बन गया देश के वीरोँ का ,
तनिक शर्म भी अब नहीँ आती है . . .
जिसके जीवन रस से मानव जीवन ,
सदियोँ से जीवन पाता रहा है ,
करुणा पुकार उन मूक पशुओँ की ,
मानव को अब कहाँ सुनाई देती है . . .
बूचड़खानोँ मेँ रोज पशुओँ के कुल ,
मशीनोँ से खत्म किये जाते है ,
कुछ पैँसोँ के लालच मेँ इंसान ,
अपनी माँ पर छुरी चलबाता है . . .
गौतम महावीर भी अब रोते होँगे ,
अपनी अहिँसा पाठ को खोते देख ,
मुरलीधर की मुरली रोती ,
अपनी मैया के आँसु देख ,
शंकर भोले अब आँखे खोलो ,
नंदी की रक्षा कर्तव्य तुमारा बनता है . . .
"जय
गौधन पर छुरी चलाई जाती है . .
खून पानी बन गया देश के वीरोँ का ,
तनिक शर्म भी अब नहीँ आती है . . .
जिसके जीवन रस से मानव जीवन ,
सदियोँ से जीवन पाता रहा है ,
करुणा पुकार उन मूक पशुओँ की ,
मानव को अब कहाँ सुनाई देती है . . .
बूचड़खानोँ मेँ रोज पशुओँ के कुल ,
मशीनोँ से खत्म किये जाते है ,
कुछ पैँसोँ के लालच मेँ इंसान ,
अपनी माँ पर छुरी चलबाता है . . .
गौतम महावीर भी अब रोते होँगे ,
अपनी अहिँसा पाठ को खोते देख ,
मुरलीधर की मुरली रोती ,
अपनी मैया के आँसु देख ,
शंकर भोले अब आँखे खोलो ,
नंदी की रक्षा कर्तव्य तुमारा बनता है . . .
"जय
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