कलिया करती अब पुकार ,
हमेँ भी खिलने दिया होता ।
पुष्प बनकर हम भी महकते
हमेँ एक मौका तो दिया होता ।
मिठास से भरे इन फलोँ को
हम भी तो सृजित कर सकते ,
हमेँ अपने जीवन को जीने का
जो वागवां ने हक दिया होता ।
बेटी बना गुनाह किया रब तूने
धरा पर आने का हक दिया होता ।
माँ तड़प उठी हूँ तेरे निर्णय से
मेरा भी मत तो लिया होता ।
मैँ उस कबरिस्तान से सहमू
या जिसमेँ मैँ पलती हूँ उससे ,
साँस लेने से पहले रोक दी गईँ
हमेँ साँस लेने का हक दिया होता ।
"जय कुमार" 27/11/2013
हमेँ भी खिलने दिया होता ।
पुष्प बनकर हम भी महकते
हमेँ एक मौका तो दिया होता ।
मिठास से भरे इन फलोँ को
हम भी तो सृजित कर सकते ,
हमेँ अपने जीवन को जीने का
जो वागवां ने हक दिया होता ।
बेटी बना गुनाह किया रब तूने
धरा पर आने का हक दिया होता ।
माँ तड़प उठी हूँ तेरे निर्णय से
मेरा भी मत तो लिया होता ।
मैँ उस कबरिस्तान से सहमू
या जिसमेँ मैँ पलती हूँ उससे ,
साँस लेने से पहले रोक दी गईँ
हमेँ साँस लेने का हक दिया होता ।
"जय कुमार" 27/11/2013
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