Tuesday, 5 November 2013

मेरे भाव

 मेरे भाव 


जोगी उतर गया , 
अब तेरा जोग ।  
शर्मिँदा आज संत , 
देखकर तेरा भोग ।। 

"जय" 31 /08/2013









वतन की शान


वतन की शान शौकत ,
कम होने ना देँगे । 
दुश्मनो को देश के , 
आँगे होने ना देँगे . . .
जहर देश की फिजाओँ मैँ , 
तुम घोल ना पाओगे , 
नफरत के बीजो को , 
अंकुरित होने ना देँगे . . . 
मुशकिले आये चाहे आये तूफान , 
अपने वतन के पत्तोँ को , 
हिलने ना देँगे . . . 
मुश्किल से सँभाला है , 
हमने चैनो अमन को , 
योँ खाक मैँ मिलने ना देँगे . . . 
दुश्मनी बैठा रखी है , 
तुने अपने दिल मैँ , 
क्योँ बार पीछे से करता ? 
हम अपने वीरो को , 
योँ शहीद होने ना देँगे....... "जय"


 

मेरे भाव

 जोगी भोगोँ मेँ फँसे , 
करते काले काम । 
अब किसको झूठा कहेँ , 
बताओ आसाराम . . . 
सारा जग शर्मिँदा है , 
सुनकर तुमरे काम । 
कैसेँ समझा सकेँ , मेरे भाव 
समझाओ आसाराम . . . 
वासनाओँ मेँ पड़कर , 
भूल गये तुम श्याम । 
विट्ठल्ला अब पूँछ रहे , 
बताओ आसाराम . . .
अपने ओछे काम से , 
तुम धर्म करो बदनाम । 
आज सब पूँछ रहे , 
सुनाओ आसाराम . . .
यह किसके है आश्रम , 
इनमेँ किसका दाम । 
पूँछे अब भक्त तुमारे  
समझाओ आसाराम . . . . . 
"जय" २/०९/१३ 


 

मेरे भाव

 ख्यालात को भी अपने , 
महफूज रखो , 
इस जमाने मेँ , 
क्या नही लुटता दोस्त ? . . .
"जय" ०३/०९/१३ 

मंदिर मस्जिद् बहुत वन गये , 
अब मानवता का एक घर , 
बनाना होगा . . . . 
जिसमेँ ना रह पाये कोई धर्म , 
इसमेँ सिर्फ मानव को , 
रहना होगा . . . . 
मिट जाएँ सब भेद भाव , 
जात क्षैत्र का भाव मिटे , 
ऊँच नीच की बात ना होवे , 
रंग रुप का भेद मिटे , 
ऐँसा एक दीपक , 
जलाना होगा . . . . 
"जय" ०५/०९/१३


 

मेरे भाव

अँधेरा होने से पहले , 
ज्ञान का दीपक जला लेना । 
वक्त रहते अपने आप से , 
मुलाकात कर लेना . . . .
मुशकिल से मिला है , 
कुछ करने का मौका , 
अपनी हिम्मत को , 
एक बार अजमा लेना . . . . .
तन मन की हैँ भ्राँतियाँ , 
असफल सफल के सवाल , 
साँस रहते हुए , 
मैँ और मुझमैँ के , 
अंतर को पहचान लेना . . . 
"जय"०६/०६/१३ 







मेरे भाव


एक दिन कुछ ऐसा हुआ , 
मैँने अपने मन को छुआ । 
मन कहने लगा तुम क्योँ , 
दौर के साथ नही चलते , 
योँ ख्वाबो की दुनिया , 
मैँ क्योँ मचलते । 
यहाँ सब ऐसा ही चलता है , 
बच्चा शेर का , 
कुत्तो के पास पलता है । 
मँदिर मेँ आ गये तो , 
प्रसाद तो चढ़ाना ही होगा , 
यहाँ के भगवान अब मँदिरोँ मेँ कम , 
कार्यालय मेँ ज्यादा वसते है , 
मुराद पूरी करना है , 
मेँवा तो चढ़ाने ही होगेँ । 
मैँने भी जवाब दे दिया , 
और उससे साफ कह दिया । 
हमारे ख्वाबो मेँ भविष्य छिपा है , 
हमने अपनी किस्मत को खुद लिखा है । 
कहदो अपने काजगो के देवताओ से , 
अब दौर बदलने वाला है , 
अपना ईमान बदलले , 
रात के पहर खत्म हुए , 
अब आशाओ का सूरज उगने वाला है . . . 
"जय" ०७ /०९ /१३




मेरे भाव

 आसाराम के काम पर , 
हंसते आज महंत । 
कुछ की बाते छिपी पड़ी , 
वो आज भी संत . . . 
जिनकी बाते निकल पड़ी , 
वो बहरुपिया , 
सफेद कपड़ोँ के तले , 
कुछ करते काले काम , 
ऐँसे और भी होँगे संत . . . .
लोगोँ का भरोशा उठा , 
क्योँ तुले हो आस्था का , 
करने को तुम अंत . . . .
हमेँ धर्म के ठेकेदारो से , 
धर्म मुक्त करना होगा , 
हम अपनी संस्कृति को , 
बदनाम ना होने देँगे , 
जिसका कोई आदि ना अंत . . . 
"जय" ११ /०९ /०३ 



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